अनिल कुमार
जिला ब्यूरो हेड
ब्यावर रायपुर। राजधानी स्थित होम्योपैथिक हॉस्पिटल में विश्व होम्योपैथी दिवस के अवसर पर होम्योपैथी पद्धति के जनक और महान चिकित्सक डॉ. सैमुअल हैनीमैन की 271वीं जयंती अत्यंत श्रद्धापूर्वक और हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर चिकित्सा जगत से जुड़े लोगों और स्थानीय नागरिकों ने डॉ. हैनीमैन के मानवता के प्रति योगदान को याद किया।
पुष्पांजलि एवं माल्यार्पण कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि और चिकित्सा अधिकारी प्रभारी डॉ. कुलदीप मेहरा ने की। उन्होंने कंपाउंडर कमलेश सांवरिया एवं उपस्थित गणमान्य नागरिकों के साथ डॉ. हैनीमैन के चित्र पर पुष्प अर्पित कर माल्यार्पण किया। इस गरिमामय समारोह के बाद सभी उपस्थित जनों के लिए अल्पाहार का भी आयोजन किया गया।
बिना दुष्प्रभाव के प्रभावी उपचार है
होम्योपैथी उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए डॉ. कुलदीप मेहरा ने विश्व होम्योपैथी दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “होम्योपैथी केवल एक चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि प्राकृतिक उपचार की एक वैज्ञानिक कला है। यह ‘समरूपता के सिद्धांत’ पर आधारित है, जो रोग को जड़ से मिटाने में सक्षम है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पद्धति पूरी तरह सुरक्षित है और इसका शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता।”
मानवता को डॉ. हैनीमैन की देन डॉ. मेहरा ने डॉ. सैमुअल हैनीमैन को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने विश्व को एक ऐसी सरल और प्रभावी चिकित्सा प्रणाली दी है, जो आज के समय में और भी अधिक प्रासंगिक हो गई है। उन्होंने सभी को होम्योपैथी दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए आह्वान किया कि बेहतर स्वास्थ्य के लिए अधिक से अधिक लोग इस पद्धति को अपनाएँ।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. मेहरा ने सभी का आभार व्यक्त किया और चिकित्सा कर्मियों को सेवा भाव से कार्य करने हेतु प्रेरित किया।