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ज्ञान की रेल’ में गूंजा प्राकृतिक खेती का मंत्र: ब्यावर में “आपणों खेत–आपणी खाद” अभियान का आगाज।

अनिल कुमार, जिला ब्यूरो हेड, ब्यावर

ब्यावर | बलूपुरा आज की आधुनिक खेती में जहां रासायनिक खादों का बोलबाला है, वहीं राजस्थान सरकार की “आपणों खेत–आपणी खाद” मुहिम अब नई पीढ़ी के जरिए खेतों तक पहुँच रही है। बलूपुरा के उस चर्चित विद्यालय में, जिसकी बनावट किसी रेलगाड़ी से कम नहीं लगती, आज बच्चों ने ‘प्राकृतिक खाद’ के जरिए धरती को बचाने का पाठ पढ़ा।

आकर्षण का केंद्र बना ‘ट्रेन’ वाला स्कूल
बलूपुरा स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय अपनी अनोखी संरचना के कारण पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय है। स्कूल के कमरों को रेल के डिब्बों की तरह रंगा गया है, जिससे बच्चे खेल-खेल में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। अध्यापक आसुराम मेघवाल ने बताया कि इस नवाचार से न केवल नामांकन बढ़ा है, बल्कि परीक्षा परिणाम भी उत्कृष्ट आ रहे हैं।

बच्चों को बनाया गया ‘कृषि दूत’
सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय द्वारा आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में बच्चों को अभियान की बारीकियों से अवगत कराया गया। जनसंपर्क अधिकारी सतीश सोनी ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे इस संदेश को अपने माता-पिता और आसपास के किसानों तक पहुंचाएं।

क्या है “आपणों खेत–आपणी खाद” अभियान?
कृषि सुपरवाइजर भाकर राम ने तकनीकी सत्र में बताया कि इस अभियान का मुख्य लक्ष्य यूरिया और डीएपी जैसे रसायनों को हटाकर मिट्टी को फिर से जीवित करना है।

अवधि: 6 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक पूरे राजस्थान में संचालित।

प्रमुख खाद: जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत और वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग।

फायदे: खेती की लागत में कमी, मिट्टी की जलधारण क्षमता में वृद्धि और जहर मुक्त उच्च गुणवत्ता वाली उपज।

जन-जन तक पहुँच रही मुहिम

ग्राम स्तर पर इस अभियान को सफल बनाने के लिए रात्रि चौपाल, किसान गोष्ठियां और प्रभात फेरियों का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम के अंत में विभाग द्वारा प्रचार-प्रसार सामग्री का वितरण किया गया ताकि बच्चे और ग्रामीण तकनीक को आसानी से समझ सकें।

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