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महिला आरक्षण के नाम पर भाजपा ने फैलाया झूठ का जाल, केवल चुनाव के लिए किया जा रहा इस्तेमाल: कांग्रेस

अनिल कुमार जिला ब्यूरो हेड, ब्यावर

ब्यावर। भारतीय जनता पार्टी द्वारा महिला आरक्षण के मुद्दे पर फैलाए जा रहे “भ्रमजाल” और राजनीति के खिलाफ कांग्रेस पार्टी ने मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों ने केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि भाजपा की नीयत महिलाओं को अधिकार देने की नहीं, बल्कि केवल चुनावी लाभ लेने की है।

इतिहास गवाह है: महिला सशक्तिकरण कांग्रेस की देन
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए जिला प्रभारी व प्रदेश महासचिव प्रतिष्ठा यादव और जिलाध्यक्ष किशोर चौधरी ने कहा कि महिला सशक्तिकरण की नींव कांग्रेस ने ही रखी थी। उन्होंने याद दिलाया कि 1992-93 में कांग्रेस सरकार द्वारा लाए गए 73वें और 74वें संविधान संशोधन के कारण ही आज स्थानीय निकायों और पंचायतों में महिलाओं को 33% आरक्षण मिल रहा है। इसके अलावा, 1996 और 2010 में भी कांग्रेस ने ही संसद में महिला आरक्षण बिल पेश करने की ऐतिहासिक पहल की थी।

देरी पर उठाए सवाल: “2023 का कानून 2026 तक क्यों अटकाया?”
कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार की मंशा पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए कहा कि सितंबर 2023 में संसद में सर्वसम्मति से ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित होने के बावजूद इसे जानबूझकर तीन साल तक लटकाया गया।

“हैरानी की बात है कि राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद भी केंद्र सरकार ने इसे 16 अप्रैल, 2026 की रात को नोटिफाई किया। भाजपा ने जानबूझकर इसे जनगणना और परिसीमन की कठिन शर्तों से जोड़ दिया है, ताकि आगामी चुनावों में महिलाओं को आरक्षण का वास्तविक लाभ न मिल सके।”

परिसीमन की आड़ में राजनीतिक कुटिलता
पूर्व विधायक राकेश पारीक और ब्यावर प्रत्याशी पारसमल जैन ने आरोप लगाया कि भाजपा परिसीमन के नाम पर देश का राजनीतिक मानचित्र अपनी सुविधा के अनुसार बदलना चाहती है। उन्होंने कहा कि जिस तरह राजस्थान, असम और जम्मू-कश्मीर में मनमाना परिसीमन किया गया, वही खेल अब देश स्तर पर खेलने की तैयारी है। कांग्रेस ने मांग की है कि वर्तमान 543 लोकसभा सीटों पर ही महिला आरक्षण तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।

दोहरा चरित्र: संगठन में महिलाओं की उपेक्षा
प्रेस वार्ता में भाजपा के “दोहरे चरित्र” पर कटाक्ष करते हुए कहा गया कि भाजपा में आज तक कोई महिला राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बनी, जबकि कांग्रेस में एनी बेसेंट से लेकर सोनिया गांधी तक कई महिलाओं ने नेतृत्व किया है। देश को पहली महिला प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और लोकसभा अध्यक्ष देना कांग्रेस की ही उपलब्धि है।

प्रमुख मांगें:

महिला आरक्षण को बिना परिसीमन की शर्त के तत्काल लागू किया जाए।

देश में जातीय जनगणना करवाकर OBC वर्ग की महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व (कोटे में कोटा) दिया जाए।

महिला आरक्षण को चुनावी “जुमला” बनाने के बजाय धरातल पर उतारा जाए।

इस अवसर पर खनन प्रकोष्ठ प्रदेशाध्यक्ष आशीषपाल पदावत, पूर्व सभापति शांति डाबला, पूर्व सभापति पार्वती जाग्रत, महिला कांग्रेस प्रदेश महासचिव एडवोकेट सुलक्षणा शर्मा, महिला जिलाध्यक्ष इशिका जैन, पूर्व प्रत्याशी मनोज चौहान सहित कई वरिष्ठ कांग्रेसी कार्यकर्ता और पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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