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सरहद की रक्षा के बाद अब सजदे का सफर: सेन्दड़ा के पूर्व सूबेदार मजीद कुरैशी हज के लिए रवाना”।

अनिल कुमार, जिला ब्यूरो हेड, ब्यावर

ब्यावर सेन्दड़ा। मजहबी अकीदत और वतन परस्ती का एक अनूठा मंजर मंगलवार को सेन्दड़ा ग्राम पंचायत में देखने को मिला। भारतीय थल सेना में 28 वर्षों तक दुश्मनों के दांत खट्टे करने वाले सेवानिवृत्त सूबेदार अब्दुल मजीद कुरैशी अब अपनी पत्नी जमीला बानो के साथ खुदा के दरबार में हाजिरी लगाने के लिए हज यात्रा पर रवाना हुए।

फूल-मालाओं से सजी विदाई की राहें
मंगलवार सुबह जैसे ही मजीद कुरैशी अपने निवास से रवाना हुए, पूरे गांव ने पलक-पावड़े बिछाकर उनका स्वागत किया। ग्रामीणों ने उन्हें मालाओं से लाद दिया और साफा पहनाकर उनके प्रति अपना सम्मान प्रकट किया। यह विदाई केवल एक धार्मिक यात्रा की रवानगी नहीं, बल्कि एक फौजी के प्रति पूरे क्षेत्र का आभार थी।

सरहद की सुरक्षा से इबादत के सफर तक
सूबेदार मजीद कुरैशी ने अपने जीवन के 28 बेशकीमती साल भारतीय सेना को दिए। ग्रामीणों ने गर्व के साथ कहा:

“हमारे लिए यह दोहरी खुशी का मौका है कि जिस जांबाज ने सालों तक मुल्क की हिफाजत की, आज वह उसी मुल्क में अमन-चैन की दुआ मांगने मक्का-मदीना जा रहे हैं।”

दुआओं के साथ दी गई मुबारकबाद
इस भावुक रवानगी के दौरान ग्रामीणों ने यात्री जोड़े की सुखद यात्रा की कामना की। कार्यक्रम में मुख्य रूप से अब्दुल हमीद, हाजी इब्राहिम, मोहम्मद हनीफ, अनवर, हाजी अरशीद बख्श, फारुख (जोधपुर), मोहम्मद रफीक, अकरम और फिरोज सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में सूबेदार साहब को हज की मुबारकबाद दी और विदा किया।

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